आज निर्जला एकादशी पर वैष्णव जनों के प्राणधन भगवान विष्णु को अति प्रिय है एकादशी व्रत । पुराणों के अनुसार , भगवान विष्णु ने कहा कि तिथियों में मैं एकादशी तिथि हूं । मान्यता है कि पूर्व काल में आततायी मुर दैत्य को मारने के लिए भगवान विष्णु के शरीर से एक दिव्य कन्या प्रकट हुई , जिसके हुंकार मात्र से ही मुर दैत्य भस्म हो गया । इस दिव्य कन्या को भगवान विष्णु ने एकादशी देवी कहकर पुकारा । उन्होंने वर देते हुए कहा- तुम तिथियों में श्रेष्ठ एकादशी तिथि कहलाओगी व सभी विघ्नों का नाश करने वाली देवी होगी । एक माह में दो पक्षों ( शुक्ल और कृष्ण पक्ष ) में दो एकादशी होती हैं । इस प्रकार 1 वर्ष में 24 एकादशियां होती हैं । विभिन्न नक्षत्रों का योग होने पर प्रत्येक एकादशी व्रत का नाम तथा महत्व भिन्नभिन्न होता है । मान्यतानुसार , एकादशी के दिन अन्न का त्याग करना चाहिए । एकादशियों में निर्जला एकादशी व्रत का विशेष महत्व है , जो ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन रखा जाता है इसे भीमसेन एकादशी भी कहते हैं । यह व्रत बिना जल पिए रखा जाता है । व्रत के पूर्ण होने बाद ही द्वादशी को जल पीने का व...
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