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1/6/2020 निर्जला एकादशी Nirjala ekadashi

आज निर्जला एकादशी पर वैष्णव जनों के प्राणधन भगवान विष्णु को अति प्रिय है एकादशी व्रत । पुराणों के अनुसार , भगवान विष्णु ने कहा कि तिथियों में मैं एकादशी तिथि हूं । मान्यता है कि पूर्व काल में आततायी मुर दैत्य को मारने के लिए भगवान विष्णु के शरीर से एक दिव्य कन्या प्रकट हुई , जिसके हुंकार मात्र से ही मुर दैत्य भस्म हो गया । इस दिव्य कन्या को भगवान विष्णु ने एकादशी देवी कहकर पुकारा । उन्होंने वर देते हुए कहा- तुम तिथियों में श्रेष्ठ एकादशी तिथि कहलाओगी व सभी विघ्नों का नाश करने वाली देवी होगी । एक माह में दो पक्षों ( शुक्ल और कृष्ण पक्ष ) में दो एकादशी होती हैं । इस प्रकार 1 वर्ष में 24 एकादशियां होती हैं । विभिन्न नक्षत्रों का योग होने पर प्रत्येक एकादशी व्रत का नाम तथा महत्व भिन्नभिन्न होता है । मान्यतानुसार , एकादशी के दिन अन्न का त्याग करना चाहिए । एकादशियों में निर्जला एकादशी व्रत का विशेष महत्व है , जो ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन रखा जाता है इसे भीमसेन एकादशी भी कहते हैं । यह व्रत बिना जल पिए रखा जाता है । व्रत के पूर्ण होने बाद ही द्वादशी को जल पीने का विधान है । स्वास्थ्य के अनुरूप स्वयं का ध्यान रखते हुए ही निर्जला एकादशी का व्रत धारण करना चाहिए । 

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Today, the life of Vaishnav people on Nirjala Ekadashi is very dear to Lord Vishnu.  According to the Puranas, Lord Vishnu said that among the dates, I am Ekadashi.  It is believed that a divine girl appeared from the body of Lord Vishnu to kill the terrorist Mur demon in the earlier period, the Mur monster was consumed by the mere humiliation.  Lord Vishnu called this divine girl as Ekadashi Devi.  He said while giving the bride- You will be called the best Ekadashi date in the dates and will be the Goddess who will destroy all obstacles.  There are two Ekadashi in two sides (Shukla and Krishna Paksha) in a month.  Thus, there are 24 monasteries in 1 year.  The name and importance of each Ekadashi fast is different when different Nakshatras are combined.Varies.  According to the norm, food should be sacrificed on the day of Ekadashi.  Nirjala Ekadashi fast has special significance in Ekadashi, which is observed on the day of Shukla Paksha Ekadashi of Jyeshtha month, it is also known as Bhimsen Ekadashi.  This fast is kept without drinking.  There is a law to drink water on Dwadashi only after completion of fast.  One should observe fasting of Nirjala Ekadashi keeping in mind his health.

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