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#jharkhand Election @2024

: *हेमंत सोरेन सरकार में सिमडेगा हुआ बेहाल*

👉 रोजगार न होने से युवा, किसान और मजदूर पलायन को मजबूर.

👉 मानव तस्करी बढ़ी. दूसरे राज्यों में बेची जा रहीं बेटियां.

👉 सिमडेगा शहरी क्षेत्र में ही 70 फीसदी आबादी शुद्ध पेयजल से वंचित.

👉 स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव. ज्यादातर मरीजों को रेफर किया जा रहा.

👉 उच्च शिक्षा के लिए कुछ नहीं हुआ. युवा रांची या अन्य महानगरों पर निर्भर.

#JharkhandElection2024
: युवाओं को रोजगार देने में हेमंत सरकार हुई बेदम
बेरोजगारी दर और पलायन में झारखंड नंबर- 1

#JharkhandElection2024
 *बेटी मांगे न्याय*

ताकि झारखंड में लव जिहाद की शिकार बेटी की इज्जत का न हो सौदा
फैसला आपको करना है...
#JharkhandElection2024
[30/10, 4:45 pm] UP BULANDELKHAND MANISH JI @2024 JH AE Artificial: *सिमडेगा में रोजगार के नाम पर महिलाओं की तस्करी*
👉 सिमडेगा विधानसभा में रोजगार की भारी कमी.

👉 ऐसे में पलायन को मजबूर महिलायें और बेटियां.

👉 रोजगार के नाम पर दूसरे राज्यों में लड़कियों को बेचा जा रहा.

👉 दिल्ली, पंजाब जैसे राज्यों में घरेलू नौकरी के लिए भेजा जाता है.

👉 महिला तस्कर कुछ लड़कियों को देह-व्यापार में धकेल रहे.

#JharkhandElection2024
44 साल से JMM का विधायक, फिर भी...*
*लिट्टीपाड़ा में डायरिया और मलेरिया से मर रहे लोग*


👉 झारखंड में 5 साल से हेमंत सोरेन और लिट्टीपाड़ा में JMM का विधायक.

👉 फिर भी स्वास्थ्य के क्षेत्र में यहां कोई काम नहीं किया गया.

👉 इसलिए लोग डायरिया और मलेरिया जैसी बीमारयों से हर साल मर रहे.

👉 इलाज के अभाव में आये दिन क्षेत्र के लोगों की मौत हो रही.

👉 नवंबर 2023 में यहां कई बच्चों की ब्रेन मलेरिया के कारण मौत हुई.

👉 पहाड़िया समुदाय सबसे ज्यादा प्रभावित. इन्हें किसी भी योजना का लाभ नहीं मिलता.

#JharkhandElection2024
l: *भाजपा सरकार में बदली लिट्टीपाड़ा की तस्वीर*

👉 पूरे झारखंड की तरह लिट्टीपाड़ा में भी 2014 से 2019 के दौरान सबसे ज्यादा काम हुआ. 

👉 इस दौरान राज्य में भाजपा सरकार और रघुवर दास मुख्यमंत्री थे.

👉 पहाड़ी गांवों में कुआं, चापाकल और सोलर पैनल डीप बोरिंग की सुविधा दी गई.

👉 इन परियोजनाओं से लोगों के जीवन में सुधार आया.

👉 लेकिन हेमंत सरकार में इस ओर कोई प्रयास नहीं किये गए.

👉 इससे पीने के पानी से जुड़ी कई महत्वाकांक्षी परियोजनाएं दम तोड़ रहीं.

#JharkhandElection2024
: *लातेहार में न बेहतर शिक्षा और न ही रोजगार*
*भ्रष्टाचार से पीड़ित हो पलायन कर रहा बेरोजगार*

👉 लातेहार में JMM विधायक ने नहीं कराया कोई विकास कार्य.

👉 यहां उच्च शिक्षा के साधन नहीं, छात्रों को बाहर जाना पड़ रहा.

👉 सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार मौजूद, लोगों के काम नहीं होते.

👉 यहां रोजगार के कोई साधन नहीं, लोग पलायन को मजबूर.

👉 कृषि प्रधान क्षेत्र, फिर भी सिंचाई की कोई उचित व्यवस्था नहीं.

#JharkhandElection2024
[*ठगबंधन सरकार में*
*युवाओं के टूटे सपने*

👉 2019 विधानसभा चुनाव से पहले 85,122 थी शिक्षित बेरोजगारों की संख्या.

👉 अब 6,76,885 हो गया है शिक्षित बेरोजगारों का आंकड़ा.

👉 झारखंड के विभिन्न विभागों में फिलहाल 2,87,129 पद खाली.

👉 प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग में 1.42 लाख पद रिक्त.

👉 प्राथमिक शिक्षा विभाग में सिर्फ 36 हजार लोगों की नियुक्तियां.

👉 गृह और स्वास्थ्य विभाग को मिलकर लगभग 89 हजार पद खाली.

#JharkhandElection2024
*झारखण्ड में हुआ शिक्षा का मजहबीकरण*
*सरकारी स्कूलों में जोड़ा गया "उर्दू"*

👉 राज्य के कुल 427 सामान्य स्कूलों के नाम में उर्दू जोड़ा गया.

👉 देवघर जिले के 156 और गोड्‌डा के 88 स्कूलों में उर्दू लिखा.

👉 गिरिडीह में 67, पलामू के 50 स्कूलों के नाम में उर्दू जोड़ा गया.

#JharkhandElection2024
[l: *संथाल में घुसपैठिये बना रहे जमाई टोले*

👉 साहिबगंज और पाकुड़ में आदिवासी बेटियों को बहलाकर उन्हें तीसरी-चौथी पत्नी बनाया जा रहा.

👉 आदिवासी परिवार को 5 हजार रुपए देकर, उन पर 50 हजार का कर्ज चढ़ा दिया जाता है.

👉 कर्ज नहीं चुकाने की स्थिति में दबाव बनाकर आदिवासी बेटियों से शादी की जाती है.

👉 अब इनकी जमीन हड़पने के लिए नोटरी के माध्यम से दान पत्र बनवाये जाते हैं.

👉 दान में ली गई जमीन में मस्जिद और मदरसों के साथ जमाई टोले बनाए जा रहे.

#JharkhandElection2024

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लिट्टीपाड़ा में साफ़ पानी और पलायन रोकने को...
कुछ नहीं कर पाई हेमंत सरकार

👉 भले ही हेमन्त सोरेन खुद को आदिवासी कहते हों, लेकिन इनके मुख्यमंत्री रहते आदिवासी ही सबसे ज्यादा परेशान है.

👉 ऐसा ही है लिट्टीपाड़ा विधानसभा क्षेत्र में, जहां आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन ही सुरक्षित नहीं है.

👉 यहां पाइपलाइन की कोई व्यवस्था नहीं होने से लोग नदी, झरना व जोरिया का दुषित पानी पीने को विवश हैं.

👉 कुछ गांवों का तो हाल ऐसा है कि लोग उस पानी को पीते हैं, जहां मवेशी नहाते हैं और पानी पीते हैं.

👉 कुछ गांव ऐसे भी हैं, जहां पेयजल के लिये पथरीले रास्तों से गुजरते हुए 5-7 किमी दूर जाना पड़ता है.

पलायन को मजबूर
👉 इस विधानसभा क्षेत्र में कोयला भरपूर मात्रा में उपलब्ध है. इसके चलते 2-3 बड़ी कंपनियों के कोलमाइंस भी हैं.

👉 हालांकि इसमें भी बाहरी लोगों का कब्जा है. इससे बहुत ही कम स्थानीय लोगों को इसमें रोजगार मिला है.

👉 ऐसे में ज्यादातर स्थानीय आदिवासी रोजी-रोटी की तलाश में दूसरे राज्यों में पलायन कर जाते हैं.

👉 इस वजह से क्षेत्र में पहले के मुकाबले आदिवासियों की आबादी कम हुई है, जबकि बाहरियों की जनसंख्या बढ़ी है.

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